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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत मजबूत संस्थाओं और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा: गजेंद्र सिंह शेखावत

Shekhar pandey

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125वीं जयंती पर केंद्रीय मंत्री ने कहा— शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और संवैधानिक मूल्यों को सशक्त बनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उन्हें राष्ट्र निर्माण का दूरदर्शी शिल्पकार बताते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी विरासत मजबूत संस्थाओं का निर्माण और राष्ट्रहित के प्रति अटूट समर्पण है।

शेखावत ने अपने लेख में कहा कि डॉ. मुखर्जी का योगदान केवल राजनीतिक जीवन तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने शिक्षा, विज्ञान, उद्योग, संस्कृति और संवैधानिक संस्थाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए। उनका मानना था कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य केवल नेतृत्व नहीं, बल्कि मजबूत और विश्वसनीय संस्थाओं पर निर्भर करता है।

उन्होंने बताया कि डॉ. मुखर्जी सबसे कम उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने और उच्च शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार माना। स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में उन्होंने चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स और सिंदरी उर्वरक संयंत्र जैसी औद्योगिक परियोजनाओं को नई दिशा दी, जिससे आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत हुई।

लेख में बंगाल अकाल के दौरान किए गए राहत कार्यों, विभाजन पीड़ितों के पुनर्वास, भारतीय विज्ञान संस्थान में योगदान तथा महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है।

शेखावत ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का विश्वास था कि संविधान की मजबूती केवल उसके प्रावधानों से नहीं, बल्कि ईमानदार संस्थाओं, कानून के शासन और नागरिकों की जिम्मेदारी से सुनिश्चित होती है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, सांस्कृतिक संरक्षण और संवैधानिक संस्थाओं को निरंतर सशक्त करना ही डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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