उत्तर प्रदेशवाराणसी

गणेश चतुर्थी पर सहस्त्र चंडी महायज्ञ में सप्त ऋषियों का भव्य पूजन-हवन

Shekhar pandey

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वाराणसी। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम पंचकोश आश्रम में चल रहे सहस्त्र चंडी महायज्ञ में गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज के सानिध्य एवं मार्गदर्शन में भगवान गणेश का विधिवत पूजन-अर्चन करने के साथ ही सप्त ऋषियों का आवाहन, पूजन एवं विशेष हवन वैदिक विधि-विधान से कराया गया।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर प्रथम पूज्य भगवान गणेश का पूजन कर उन्हें पुष्प, अक्षत, दूर्वा, मोदक सहित विभिन्न पूजन सामग्री अर्पित की गई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन कर यज्ञाग्नि में आहुतियां समर्पित की गईं। इस दौरान विघ्नों के निवारण, सुख-समृद्धि और लोककल्याण की कामना की गई। गणपति वंदना से आश्रम परिसर भक्तिमय हो उठा।

इसी क्रम में सप्त ऋषियों का विशेष पूजन एवं हवन भी संपन्न हुआ। वैदिक परंपरा के अनुसार सप्त ऋषियों का आवाहन कर विधिवत पूजन किया गया और यज्ञाग्नि में विशेष आहुतियां दी गईं। अनुष्ठान के माध्यम से भारतीय ऋषि परंपरा, वैदिक ज्ञान, तप और साधना के प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त की गई।

इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भगवान गणेश विघ्नहर्ता एवं मंगल के अधिष्ठाता हैं, जबकि सप्त ऋषि भारतीय वैदिक ज्ञान और तपस्या की महान परंपरा के प्रतीक हैं। गणेश पूजन और सप्त ऋषि पूजन-हवन धर्म, ज्ञान, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि यज्ञ का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज, राष्ट्र और संपूर्ण विश्व के मंगल की भावना को मजबूत करना भी है।

महायज्ञ के यज्ञाचार्य आचार्य तेजमणि त्रिपाठी के निर्देशन में विद्वान आचार्यों एवं ब्राह्मणों ने दोनों अनुष्ठानों को शास्त्रोक्त एवं वैदिक विधि से संपन्न कराया। देव आवाहन, पूजन, मंत्रोच्चार, हवन एवं आहुतियों की प्रक्रिया विधिवत पूरी की गई।

इस अवसर पर डॉ. विनय मिश्रा, सच्चिदानंद तिवारी, देव नारायण शुक्ल एवं यतींद्र उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर जगद्गुरु शंकराचार्य का आशीर्वाद प्राप्त किया।

अनुष्ठान के अंत में लोककल्याण, धर्मरक्षा, राष्ट्र की उन्नति तथा सर्वजन के सुख-शांति की कामना की गई।

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