राष्ट्रीय

सेशेल्स के राष्ट्रपति को भेंट की गई मुरादाबाद की पीतल कछुआ प्रतिमा, भारत की हस्तशिल्प विरासत का प्रतीक

Nispaksh kashi

भारत की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाली उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में निर्मित पीतल की कछुआ प्रतिमा सेशेल्स के राष्ट्रपति को भेंट की गई। यह उपहार भारत की पारंपरिक शिल्पकला और दोनों देशों के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।

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मुरादाबाद, जिसे देश-विदेश में “ब्रास सिटी” के नाम से पहचान मिली है, अपनी उत्कृष्ट पीतल शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। कुशल कारीगरों द्वारा हस्तनिर्मित इस प्रतिमा में धातु ढलाई, बारीक नक्काशी और आकर्षक फिनिशिंग का बेहतरीन संगम देखने को मिलता है, जो भारतीय शिल्प परंपरा की उत्कृष्टता को प्रदर्शित करता है।

भारतीय संस्कृति में कछुआ ज्ञान, धैर्य, स्थिरता, दीर्घायु और दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है। वहीं, सेशेल्स की पहचान भी विश्व प्रसिद्ध एल्डाब्रा जायंट टॉर्टॉइज़ से जुड़ी है, जो दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अधिक आयु तक जीवित रहने वाली कछुआ प्रजातियों में शामिल है। ऐसे में यह उपहार दोनों देशों की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के बीच एक विशेष संबंध को भी दर्शाता है।

मुरादाबाद की यह पीतल प्रतिमा केवल भारतीय हस्तशिल्प की उत्कृष्टता का परिचय नहीं देती, बल्कि भारत और सेशेल्स के बीच मित्रता, साझा मूल्यों और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को भी सशक्त रूप से अभिव्यक्त करती है।

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